इस अद्भुत शिवलिंग की पूजा राजनेता क्यो करते है? यह जानकारी आपको हैरान कर देगा।
यह अद्भुत शिवलिंग कहाँ स्थित है?
बिहार के पटना से लगभग 40 किलोमीटर पूरब एस एच 106 सड़क के निकट और गंगा नदी के किनारे बैकुंठधाम बैकटपुर में यह शिवलिंग प्राचीन काल से स्थित है। इस मन्दिर में शिवलिंग के रूप में शिवजी के साथ साथ माता पार्वती भी बिराजमान है। साथ ही इस शिवलिंग में 108 छोटे छोटे शिवलिंग बने हुए है। जो इस शिवलिंग को सबसे अलग और अदभुत बनाता है।
बैकटपुर मन्दिर की विशेषताएं।
जानकारों के अनुसार यह शिवलिंग महाभारत काल के जरासंध से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि जरासंध शिव जी का परमभक्त था। वह राजगृह से गंगा नदी के किनारे बना इस मन्दिर में पूजा करने के लिए आता था। वह अपनी बाँह में शिव जी की आकृति का बना एक ताबीज पहनता था। उसे शिव जी से आशीर्वाद प्राप्त था कि जब तक उसके बाँह में यह ताबीज रहेगा उसे कोई मार नही सकता है। लेकिन श्रीकृष्ण ने छल से उस ताबीज को उसके बाँह से अलग करके गंगा नदी में प्रवाह कर दिया था। जहाँ पर यह ताबीज गिरा उसे कौड़िया खाँड़ कहा जाता था।
बैकटपुर मन्दिर का पुनः निर्माण कब हुआ?
बर्षो बाद अकबर के समय मे सेनापति रहे राजा मानसिंह जब बंगाल विद्रोह को खत्म करने के लिए जलमार्ग से जा रहे थे तो उनकी नौका यहाँ फँस गयी थी। जिसके कारण उन्हें यहीं पर रात बिताना पड़ा था। रात्रि में भगवान भोलेनाथ उनके सपने में आये और उन्होंने मन्दिर को पुनःनिर्माण करने को कहा तब राजा मानसिंह ने उसी समय मन्दिर बनाने का आदेश दिया। राजा मानसिंह के आदेश पर मन्दिर का पुनःनिर्माण किया गया। और जब वे बंगाल जीतकर बापस आये तब उन्होंने इस मन्दिर में पूजा अर्चना किया।
राजनेता क्यों करते है इस मन्दिर में पूजा?
राजा मानसिंह के बंगाल जितने के बाद ऐसी मान्यता है कि जो भी राजनेता इस मन्दिर में सच्चे मन से पूजा अर्चना करते है उनकी राजनीतिक में जीत होती है। इस लिए इस मन्दिर में राजनेता पूजा करने के लिए आते है। बिहार के CM नीतीश कुमार, पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के सांसद रविशंकर प्रसाद, बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणविजय सिंह इत्यादि कई सारे राजनेता इस मन्दिर में पूजा करने आते है।
बैकटपुर मन्दिर में पूजा कब करना चाहिए?
वैसे तो इस मन्दिर में हर रोज वाहन पूजन, मुंडन संस्कार, बिबाह इत्यादि होते रहता है। लेकिन सावन के महीना में इस मन्दिर के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। इस महीना में शिवभक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। जिसकी तैयारी पहले से ही कि जाती है। मन्दिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। शिवभक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष तैयारी की जाती है। मन्दिर जाने बाले रास्ते मे दुकानें लगाई जाती है। सावन का पूरा महीना यहाँ मेले में तब्दील हो जाता है।
बैकटपुर मन्दिर कैसे पहुँचे?
यदि आप दूसरे राज्य से हवाई मार्ग से यहाँ आते है तो यहाँ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा पटना है। पटना से बैकटपुर मन्दिर की दूरी लगभग 40 किलोमीटर पूरब है। यदि आप सड़क मार्ग पटना बख्तियारपुर फोरलेन से आते है तो जगमाल बीघा से लगभग 2 किलोमीटर उत्तर है। यदि आप रेलमार्ग से आते है तो यहाँ का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन खुसरूपुर है। खुसरूपुर रेलवे स्टेशन से इस मन्दिर की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है। इस तरह हवाई, रेल और सड़क मार्ग से यहाँ पहुंचा जा सकता है।
यहाँ विडियो में कीजिए अदभुत शिवलिंग का दर्शन

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